गृह विज्ञान विभाग का उद्देश्य शिक्षा को जीवन कौशल, स्वावलंबन और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना है । वर्ष 2005 में माननीया राजकुमारी रत्ना सिंह जी के प्रेरक प्रयासों से स्नातक (U.G.)स्तर पर स्थापित गृह विज्ञान विभागों ने 2019 में छात्राओं की अकादमिक आवश्यकताओं कें ध्यान रखते हुए स्नातकोत्तर (P.G.) स्तर तक विस्तार प्राप्त किया । विभाग ने प्रारम्भ से ही शिक्षा को ज्ञान कौशल समाज की त्रिवेणी के रूप मे विभाजित किया गया है ।
स्नातक स्तर पर प्रोजेक्ट आधारित अधिगम तथा स्नातकोत्तर स्तर पर लघु शोध की सुदढ़ परंपरा स्थापित की गई हैं । अब तक विभाग व्दारा लगभग 56 लघु शोध सफलता पूर्वक सम्पन्न कराए जा चुके हैं, जिसमे पोषण, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक स्वास्थ्य एवं उद्यमित जैसे विषयों पर अध्ययन सम्मिलित है। विभाग में पध्दति के अन्तर्गत, सात दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण, बेकरी प्रशिक्षण , दीया सज्जा, तिरंगा सैशे, बैज निर्माण आदि कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते है । इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्र- छात्राओं में रोजगारोन्मुख कौशल, सूक्ष्म उद्यमिता एवं आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना है । प्रशिक्षण कायक्रमों के माध्यमो से छात्राएं स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर उत्पाद निर्माण एवं विपणन का व्यवहारिक अनुभव प्राप्त करती है । गृहविज्ञान विभाग की विशेषता यह है कि यहाँ पाठ्यचर्चा को सामुदायिक सहकारिता से जोड़ा गया है । छात्राएं ग्राम भ्रमण, पोशण जागरूकता स्वास्थ्य परामर्श एवं प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से समाज मे सकारात्मक परवर्तन के साथ- साथ स्वयं में भी स्वावलम्बन की भावना का विकास होता है । इस प्रकार गृह विज्ञान विभाग पाठ्यचर्चा समृध्दिकरण, कोशल विकास एवं सामुदायिक सहभागिता आधारित शिक्षा समनिवित मॉडल को जाकर करता है ।
आज गृहविज्ञान विभाग केवल एक शैक्षणिक इकाई नही बल्कि नवाचार, शोध एवं जीवनोपयोगी शिक्षा का केन्द्र बन चुका है- जहाँ ज्ञान को व्यवहार से जोड़कर छात्राओं को आत्मनिर्भर, संवेदनशील और सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिक के रीप मे विकसीत किया जाता है ।